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हिमाचल में व्यावसायिक वाहनों का परमिट शुल्क बढ़ाने की तैयारी, हर दो साल में 10 फीसदी बढ़ेगा परमिट शुल्क, ड्राफ्ट अधिसूचना जारी

हिमाचल में व्यावसायिक वाहनों के परमिट और नवीनीकरण शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार

नई दरों में हर दो वर्ष बाद 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान रखा गया

परिवहन विभाग ने ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर 30 दिन में जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगीं


हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक वाहन संचालकों को जल्द ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। राज्य सरकार के परिवहन विभाग ने सभी श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों के परमिट, परमिट नवीनीकरण और काउंटर सिग्नेचर शुल्क में वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश मोटर वाहन नियम में संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद व्यावसायिक वाहन मालिकों को नई दरों के अनुसार शुल्क का भुगतान करना होगा।

इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम ने अधिसूचना जारी करते हुए आम जनता, वाहन संचालकों और संबंधित हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद संशोधित नियमों को लागू किया जाएगा।

परिवहन विभाग के अनुसार राज्य में व्यावसायिक वाहनों के परमिट शुल्क में आखिरी बार वर्ष 1999 में संशोधन किया गया था। लगभग तीन दशक बाद बदलती आर्थिक परिस्थितियों, प्रशासनिक खर्चों और परिवहन क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए शुल्क संरचना में बदलाव प्रस्तावित किया गया है।

ड्राफ्ट नियमों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि एक बार नई शुल्क दरें लागू होने के बाद उनमें हर दो वर्ष बाद स्वतः 10 प्रतिशत वृद्धि की जाएगी। बढ़ी हुई राशि को निकटतम 10 रुपये तक राउंड ऑफ किया जाएगा। इससे सरकार को भविष्य में बार-बार नियम संशोधन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और शुल्क संरचना समय के साथ स्वतः अपडेट होती रहेगी।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार मोटर कैब, ऑटो रिक्शा, मैक्सी कैब, बसें, मालवाहक वाहन, जीप स्टेज कैरिज और अन्य स्टेज कैरिज वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। राज्य के भीतर संचालित बसों और ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों पर सबसे अधिक शुल्क प्रस्तावित किया गया है।

नई प्रस्तावित दरों के तहत मोटर कैब और ऑटो रिक्शा (कॉन्ट्रैक्ट कैरिज) के लिए अस्थायी और नियमित परमिट शुल्क 50-50 रुपये रखा गया है। मैक्सी कैब के लिए भी यही शुल्क प्रस्तावित है। बसों के लिए अस्थायी परमिट शुल्क 750 रुपये तथा नियमित परमिट शुल्क 1500 रुपये निर्धारित किया गया है।

इसी तरह हल्के मालवाहक वाहनों (एलजीवी) के लिए अस्थायी परमिट शुल्क 100 रुपये और नियमित परमिट शुल्क 200 रुपये प्रस्तावित है। मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों के लिए अस्थायी तथा नियमित दोनों प्रकार का शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है। जीप स्टेज कैरिज (4+1 से 8+1 सीट क्षमता) के लिए भी दोनों श्रेणियों में 100 रुपये शुल्क प्रस्तावित है।

इसके अलावा अन्य स्टेज कैरिज और निजी सेवा वाहनों के लिए अस्थायी परमिट शुल्क 500 रुपये तथा नियमित परमिट शुल्क 1000 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं मोटर वाहन अधिनियम की धारा 88(8) के तहत जारी विशेष परमिट के लिए 250 रुपये अस्थायी और 500 रुपये नियमित शुल्क प्रस्तावित किया गया है।

सरकार ने एक महत्वपूर्ण राहत भी दी है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार भारत में स्थित विदेशी दूतावासों के स्वामित्व वाले परिवहन वाहनों के लिए जारी परमिट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

अधिसूचना में आवेदन प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। परमिट के लिए आवेदन करते समय आवेदक को नकद रसीद, ऑनलाइन भुगतान या ट्रेजरी चालान के माध्यम से निर्धारित शुल्क जमा करवाना होगा। शुल्क प्राप्त होने के बाद संबंधित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) द्वारा आवेदक को विधिवत रसीद जारी की जाएगी।

यदि प्रस्तावित संशोधन लागू हो जाता है तो इसका सीधा प्रभाव राज्य के हजारों टैक्सी ऑपरेटरों, बस संचालकों, ट्रक मालिकों और अन्य व्यावसायिक वाहन चालकों पर पड़ेगा। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग अब सरकार के अंतिम निर्णय और संभावित नई शुल्क संरचना को लेकर नजर बनाए हुए हैं।